<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-1682357945413652365</id><updated>2012-01-19T23:19:50.010-08:00</updated><title type='text'>Bhav</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://sk1960.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>Sunil Sharma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02992199244288833748</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-Z9etkckx2Ys/TjYd_5xe8cI/AAAAAAAAAPM/vT3wCtfFqnw/s220/IMG_1158.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>10</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1682357945413652365.post-5757428529968833937</id><published>2012-01-19T22:57:00.000-08:00</published><updated>2012-01-19T23:19:50.019-08:00</updated><title type='text'>वृन्दावन में वृद्ध बंगाली विधवाओं की मुक्ति नहीं होती।</title><content type='html'>वृन्दावन में वृद्ध बंगाली विधवाओं की मुक्ति नहीं होती। &lt;br /&gt;मृत्यु के वाद शवों के टुकडे़ टुकडे़ करके बोरे में भर कर यमुना किनारे डाल दिया जाता है।&lt;br /&gt;सुप्रीम कोर्ट के कडे़ निर्देश के वाद प्रशासन चेता जांच को टीम बनाई गई। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सुनील शर्मा&lt;br /&gt;मथुरा-वृन्दावन - ब्रज में बास करने और मोक्ष की कामना से वृन्दावन आने और यहां आकर बसने बाली बंगाली विधवाओं की मृत्यु के उपरान्त उनका अंतिम संस्कार दुखद व रोंगटे खडे़ कर देने वाला होता है। हाड कपाने वाली सर्दी में वृद्ध लोगों की मृत्यु अधिक हो रही है जिसका असर वृन्दावन में वास करने बाली इन वृद्ध विधवाओं पर भी पड़ रहा है। इन विधवाओं की मृत्यु के उपरान्त इनका शव कई दिनों तक सड़क किनारे पड़ा रहता है। शवों के सड़ जाने की स्थिति में उसके टुकडे़ टुकडे़ करके किसी कूड़ा ढोने बाली ढकेल में ले जाकर यमुना किनारे जमादार फेंक आते हैं। मोक्ष की प्राप्ति की आस में आई इन विधवाओं को नही मालुम कि इनकी मृत्यु के उपरान्त इनकी क्या दशा होती है। इसकी जानकारी जब जिलाधिकारी मथुरा को हुई तो उन्होंने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। इस कमेटी की मुखिया मुख्य विकास अधिकारी को बनाया गया है।&lt;br /&gt;वृन्दावन में वृद्ध बंगाली विधवाओं की हालत इतनी दयनीय है कि पहले तो यह प्राचीन मंदिरों के बारामदे और सीलन भरी कोठरियों में पड़ी रहा करती थी। आज दिनों दिन जमीनों के बड़ते दामों के कारण इनका यह आशायाना भी धीरे धीरे छिनता जा रहा है जिसके कारण इनको सड़कों के किनारे और फृटपाथ पर ही अपनी बची कुची जिन्दगी काटनी पड़ रही है। मृत्यु के उपरान्त इन वृद्धाओं को न तो कफन ही नसीब होता है और न ही जलाने को लकड़ी। सड़क पर पड़ी लाश को जमादार पहले टुकड़े टुकडे़ करता है फिर बोरे में भर कर यमुना के किनारे डाल आता है जिसे वहां मौजूद कुत्ते आवारा पशु अपना आहार बनाते रहते हैं। कहने को वृन्दावन धार्मिक नगरी है और भगवान के भजन को आयीं ये बंगाली विधवाओं के साथ हो रहे इस प्रकार के अमानवीय कृत्य पर कोई भी कथा वाचक या धर्माचार ने मानवता के नाते अंतिम संस्कार के लिए कोई व्यवस्था तक बनाने में पहल नहीं की है।&lt;br /&gt;वृन्दावन में आये श्रद्धालु महिलाओं के एक दल ने यहां रोंगडे खडे़ कर देने वाला दृय देखा तथा इसके प्रमाण भी जुटाये थे। वृन्दावन में तथा राधाकुण्ड में रह रहीं बंगाली विधवाओं की दयनीय स्थिति को श्रद्धालु महिलाओं के दल ने देखा और इस तथ्य को प्रति’िठत अंगेजी देनिक में प्रकािशत करा दिया। उक्त अखवार की खवर को संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज अल्तमास कबीर ने उक्त खवर पर सरकार से जवाब तलब कर लिया। महिला श्रद्धालुओं के दल द्वारा जुटाये गये प्रमाणों ने यह साफ कर दिया कि मथुरा वृन्दावन और राधाकुण्ड़ में रह रही सैकड़ों बंगाली वृद्ध महिलाओं के साथ कैसा अमानवीय कृत्य हो रहा है। वृद्ध आश्रमों और आश्रय सदनों में इन वृद्ध महिलाओं की मृत्यु के उपरान्त उनके शवों के टुकड़े टुकडे़ करके बोरों में भरकर जमादार यमुना के किनारे निर्जन स्थान पर ड़ाल आते हैं।&lt;br /&gt;वरि’ठ जज ने तत्काल रा’ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण को इसकी जांच करने का आदेश दिया जिसे प्राधिकरण के उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रे’िात कर दिया गया।&lt;br /&gt;उ0प्र0 विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने मथुरा के तत्कालीन जिला जज वीरेन्द्र बहादुर यादव को मामले की गहन जांच के आदेश दिये। जिला जज ने तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सपना त्रिपाठी की अध्यक्ष्ता में नौ सदस्यीय टीम गठित कर दी। टीम के सदस्यों ने तीन माह तक सैकड़ों विधवाओं से बातचीत की और उसके आधार पर 20 बिंदुओं का एक प्रपत्र तैयार किया जिसमें वृन्दावन की 450 व राधाकुण्ड की 30 से विधवाओं से सम्बन्धित जानकारी जुटाई गई।&lt;br /&gt;जांच समिति ने विधवाओं से बातचीत की वीडि़यों रिकाॅर्डिंग भी कराई जिसके आधार पर यह पता चला कि तीन चार दिन तक शवों को सड़ाने के बाद स्वीपर उसके टुकडे़ टुकडे़ करके बोरे में भरकर कहीं लेजाकर फेंक आता है।&lt;br /&gt;जांच समिति ने जब इस बारे में आश्रम संचालकों से जानकारी की तो उन्होंने इसका कारण उनके पास अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त पैसो का न होना बताया। जिसके कारण ऐसा अमानवीय कृत्य कराया जा रहा है।&lt;br /&gt;सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए 29 दिसम्बर 2011 को प्रदेश के समाज कल्याण, महिला कल्याण विभाग एवं बालविभाग विकास पु’टाहार विभाग के प्रमुख सचिव सदाकांत ने राज्य महिला कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक एसके सिंह को निर्देश दिया कि वे जल्द ही मथुरा वृनदावन क्षेत्र का भ्रमण करें और वहां के जज न्यायाधीश और जिलाधिकारी से विचार विर्मश कर 30 जनवरी तक समूची रिर्पोट शासन को सौंपे। साथही उन्होंने एसके सिंह को शासन इस मामले में गंम्भीरता से अवगत कराते हंए कहा कि जल्द ही कोई ठोस कार्यवाही करते हुए शख्त कदम उठाना चाहता है।  &lt;br /&gt;जिलाधिकारी एनजी रविकुमार ने इस महत्वपूर्ण मामले को संज्ञान में लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी एस.मथु शालिनी की अध्यक्षता में एक टीम का गठन कर दिया है जिसमें विकास प्राधीकरण उपाध्यक्ष वीके पवार व एडीएम फायनेन्स मनमोहन चैधरी भी शामिल थे। जांच टीम शीध्र ही जांच कर अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सुनील शर्मा  मथुरा।  09319225654&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1682357945413652365-5757428529968833937?l=sk1960.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sk1960.blogspot.com/feeds/5757428529968833937/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2012/01/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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href="http://pahleebar.blogspot.com/2011/08/blog-post_10.html#comment-form"&gt;पहली बार: किसलय&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आपकी रचना के लिए बहुत बहुत बधाई। आप इसी तरह महकती रहें खिलखिाती रहे। और अपनी नई रचनाओं से हमें भी अवगत कराती रहें। परमात्मा आपको और अधिक ऊचाईयों तक पहुँचाये।&lt;br /&gt;इसी कांमना के साथ सुनील शर्मा मथुरा  &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1682357945413652365-4367560042369106785?l=sk1960.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://pahleebar.blogspot.com/2011/08/blog-post_10.html#comment-form' title='पहली बार: किसलय'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sk1960.blogspot.com/feeds/4367560042369106785/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2011/08/blog-post_10.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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कि आपातकाल में पूरा देश व्यवस्थित सा दिखने लगा था। अधिकारी कर्मचारी सही समय व सही कार्य करने के लिये विवश हो गये थे। मगर कुछ गलतियां तो हुंई वह नीचे स्तर पर आपातकाल लगाने के पीछे की मंशा मेरे हिसाव से ठीक थी । आज जो हालात देखने को मिल रहे हैं उसमें न तो आम आदमी के काम सही ढंग से हो पा रहे हैं न ही खान पान की वस्तुएं शुद्ध हैं। और न ही शुद्ध हवा है न शुद्ध पानी पीने को मिल रहा है दूध भी जो सबसे महत्व पूर्ण वस्तु है वह भी शुद्ध नही है । हम कह सकते है कि जिससे हमारी पीढी को मजबूती मिलेगी वह भी शुद्ध नही है शिक्षा के क्षेत्र में क्या हो रहा है हर तरफ देखिये आपको भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार दिखाई देगा कल तक जिनके पास कुछ भी नही था वह अव करोड़ो अरबों में खेल रहे हैं आखिर कैसे और कहां से आ रही है यह अफरात दौलत। देश का हर नेता आज अरबों खरबों में खेल रहा है। चुनावों में प्रत्याशियों से सम्पत्ति का ब्यौरा तो मांगा जाता है पर चुनाव आयोग प्रत्याशियों से आय के श्रौत के बारे में क्यों नहीं पूछता है।&lt;br /&gt;हमारे हिसाव से देश से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिये पुलिस का राष्ट्रीय करण जरूरी हो गया है एक प्रान्त की पुलिस को दूसरे प्रान्तों मे भेजा जाना चाहिये। इससे भ्रष्टाचार को समाप्त करने कुछ हद तक मदद मिलेगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1682357945413652365-6846772776032711690?l=sk1960.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sk1960.blogspot.com/feeds/6846772776032711690/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2011/08/blog-post_1553.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/6846772776032711690'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/6846772776032711690'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2011/08/blog-post_1553.html' title='आपातकाल में पूरा देश व्यवस्थित सा दिखने लगा था।'/><author><name>Sunil Sharma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02992199244288833748</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-Z9etkckx2Ys/TjYd_5xe8cI/AAAAAAAAAPM/vT3wCtfFqnw/s220/IMG_1158.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1682357945413652365.post-376662030636074935</id><published>2011-08-01T07:57:00.000-07:00</published><updated>2011-08-01T07:58:19.987-07:00</updated><title type='text'>सैंकड़ो शिक्षक ले रहे हैं घर बैठे वेतन</title><content type='html'>मथुरा में सर्व शिक्षा अभियान बना वरदान &lt;br /&gt;सैंकड़ो शिक्षक ले रहे हैं घर बैठे वेतन&lt;br /&gt;’मथुरा, ज्यौ -ज्यौ दवा की त्यौ-त्यौ मर्ज बढता गया’ यह पक्तियां जनपद मैं सरकारी सर्व शिक्षा अभियान पर सटीक साबित हो रही हैं। जहां शिक्षा विभाग और सत्ता धारी नेताओं की मैहरबानी से सैकड़ों शिक्षक घर बैठे वेतन प्राप्त कर रहे है। तो कहीं-कहीं चंद छात्रो पर शिक्षकों की फौज तैनात कर दी गयी है। &lt;br /&gt;’सब पढें सब बढे’ं नारे के साथ चलाया जा रहा सर्व शिक्षा अभियान अरबों की राशि खर्च करने के बाबजूद भी जनपद में कहीं भी गति पकड़ता नजर नहीं आ रहा है। बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती होने एवं उन्है विद्यालयों में तैनात किये जाने के बाबजूद भी ना तो प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के दर्शन हो रहे है और न ही शिक्षकों की अनुपस्थिति के चलते बच्चे नजर आ रहे है। जानकार सूत्रो का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों की सांठ-गांठ से दो से पांच हजार प्रतिमाह सुविधा शुल्क  लेकर अनुपस्थित शिक्षकों को उपस्थित दर्शाकर घर बैठे वेतन दिला दिया जाता है तो वहीें दूरस्थ विद्यालयों में तैनात शिक्षकों को घर के नजदीक ही 25 से लेकर 50 हजार तक सुविधा शुल्क लेकर तैनात कर दिया जाता हैं। जो कभी विद्यालय आना भी उचित नहीं समझते हैं। जब कि उन्है विद्यालय निर्माण एवं कक्षा-कक्ष निर्माण की जिम्मेदारी तो सौंप दी जाती है। लेकिन जनगणना, पल्स पोलियों, मतदाता सूची पुर्नरीक्षण सहित अन्य सरकारी कामकाज से मुक्त कर दिये जाते हैं। गत दिनों ग्राम प्रधानो द्वारा शिक्षकों एवं शिक्षा विभाग के अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोला गया तो जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजू राणा ने शख्थी दिखाते हुये कई ब्लाकों के सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारियों पर गाज गिरा दी गई। जिससे शिक्षकों में हड़कम्प मच गया। लेकिन उन्होने विद्यालायों में उपस्थित दर्ज कराने के स्थान पर अपने को बीमार दर्शाकर मैडीकल जमा करा दिये।सूत्रों का कहना है कि सर्वशिक्षा अभियान की सबसे अधिक दुर्दशा जनपद के सबसे दूरस्थ नौहझील ब्लाक की है जहां बमुश्किल 20 प्रतिशत शिक्षक ही विद्यालयों में उपस्थित हो रहे है। जब कि 80 प्रतिशत शिक्षक रिकार्ड में तो उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। लेकिन विद्यालयों में जनता और बच्चों को काफी समय से नजर नहीं आ रहे हैं। इसी तरह छाता ब्लाक के अलवायी प्रा0 विद्यालय की शिक्षका आरती सारस्वत, नगला सिरौली की कीर्ति गुप्ता, रेनू वर्मा मथुरा ब्लाक के नगला काशी मे कार्यरत शिक्षका दीपा तौमर के जुलाई 09 से लगातार अनुपस्थित रहने पर तमाम चेतावनी को नजर अन्दाज करने पर बी एस ए राजू राणा ने निलाम्बित कर दिया है और बर्खास्त करने की चेतावनी दी है। लेकिन इसके बाबजूद भी सर्व शिक्षा अभियान में दूर-दूर तक सुधार नजर नहीं आ रहा है। बताया जाता है कि शिक्षा विभाग द्वारा दूरस्थ स्थानों से शिक्षकों को हटाकर हाइवे स्थित विद्यालयों में चन्द छात्रों पर ही शिक्षकों की फौज तैनात कर दी है। जों अफसरों के दौरे के समय ही नजर आते है। जब कि दूरस्थ विद्यालयों में बड़ी संख्या में बच्चों की उपस्थिति होने के बाबजूद भी शिक्षक दिखाई नहीं दे रहें है। मडुआका के प्रधान कुंवर सिंह एड0 सुरीर के प्रधान रघुनाथ सिंह एड0, बाघर्रा के प्रधान मुकेश भारद्वाज, शुशील शर्मा कहते है कि सर्वशिक्षा अभियान के नाम पर अफसर लूट करने में लगे हुये है। जिनकी सांठ गांठ से शिक्षक विद्यालयों में न आकर घर बैठे वेतन प्राप्त कर रहे है। जिससे प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयांे में शिक्षा की हालत दयनीय बनी हुई है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1682357945413652365-376662030636074935?l=sk1960.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sk1960.blogspot.com/feeds/376662030636074935/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2011/08/blog-post_7854.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/376662030636074935'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/376662030636074935'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2011/08/blog-post_7854.html' title='सैंकड़ो शिक्षक ले रहे हैं घर बैठे वेतन'/><author><name>Sunil Sharma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02992199244288833748</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-Z9etkckx2Ys/TjYd_5xe8cI/AAAAAAAAAPM/vT3wCtfFqnw/s220/IMG_1158.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1682357945413652365.post-1331308596130576116</id><published>2011-08-01T07:54:00.000-07:00</published><updated>2011-08-01T07:55:05.742-07:00</updated><title type='text'>यमुना के बिना कैसे होगी मुक्ति</title><content type='html'>यमुना के बिना कैसे होगी मुक्ति &lt;br /&gt;मोक्ष की प्राप्ति और मृत आत्माओं की शान्ति के लिये यमुना किनारे शवों का दाह संस्कार किया जाता है। लेकिन आज इन मृत आत्माओं के लिये यमुना जल भी नसीब नहीं है। यमुना नदी में शहर के गंदे नाले तो जाकर मिल सकते है लेकिन मृत आत्माओं की शरीर के अवशेष यमुना में नही जा सकते है। अब किसी भागीरथ की पुनः आवश्यकता है जो कि मोक्षधाम के आस-पास इकट्ठा हो रहे मृत शरीर के अवशेषों के लिये यमुना को यहां तक ला सके।&lt;br /&gt; राजा सगर के पुत्रों की मुक्ति के लिये भागीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर अवतरित करके जहां उनकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्थ किया था वहीं आज तक यमुना हमारे जीवन और संस्कृति का अंग है। लेकिन जहां मथुरा भी धार्मिक स्थानों में से एक है जहां यदि किसी की मृत्यु हो जाती है और उसे यमुना नदी का जल मिल जाय तो उसकी पूर्ण मुक्ति मानी जाती है। नारद पुराण के अनुसार ‘‘अयोध्या मथुरा माया काशी कांची ह्यवन्तिका पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिका’’ भारत की सात मोक्ष दायिनी पुरियों में से मथुरा भी एक पुरी मानी गयी है। जिसका आम जनमानस में बड़ा महत्व हैं। लेकिन शहर के बीचों-बीच बने दो शवदाह गृह ऐसे हैं। जिनमें अब तक लाखों मृत शरीरों को जलाया जा चुका है। लेकिन मजबूरी में परिवारी जन इन शवदाह ग्रहों में अपने इष्ट मित्र परिजनों आत्मीय जनों की दाह क्रिया तो करते है लेकिन दाह क्रिया के बाद क्या उनके शरीर के अवशेष यमुना नदी में प्रवाहित हो पाते है। यह कोई न तो सोचता है न ही देखता है। &lt;br /&gt; हिन्दू मान्यताओं के अनुसार मान्यता है कि मृत शरीर की दाह क्रिया के बाद बचे अवशेष को यमुना में प्रवाहित किया जाय तभी मृत आत्मा को मुक्ति मिल पाती है। लेकिन आज तक लाखों आत्माएं मुक्ति की बाट जोह रही है शायद इन्हें मुक्ति नहीं मिली हो क्योंकि इनके अवशेषों को यमुना नदी में तो बहाया ही नहीं गया हैं।&lt;br /&gt; करोंड़ों रुपया खर्च करने के बाद नगर के धन्नासेठों ने पुण्यलाभ की कामना से मोक्षधाम का निर्माण तो कराया लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया कि मृत शरीर के अवशेष यमुना तक कैसे पहुंचेंगे। न ही यमुना इनके निकट आ सकती है ओर न ही मोक्षधाम यमुना के निकट जा सकता है। मोक्षधाम व यमुना के बीच भी यमुना में किसी अन्य पार्टी की जमीन है वह अपनी जमीन से किसी प्रकार की नाली भी यमुना तक नहीं निकालने देता है। इससे अवशेषों को किसी तरह से भी यमुना में प्रवाहित नहीं किया जा सकता है। &lt;br /&gt; उपर से पालिका प्रशासन ने मोक्षधाम के पीछे अपना खत्ता यानी पूरे शहर का कूड़ा करकट डालने का डलावघर तो बना दिया है। लेकिन मोक्षधाम से लेकर यमुना तक कोई व्यवस्था नहीं की है। &lt;br /&gt; हजारों लाखों ब्रज में मरने वाले मुक्ति के लिये भटक रहे है उनके मृत शरीर के अवशेष यमुना में मिलने को तड़फ रहे है तथा परिवारीजनों मलाल है कि उनके परिजनों आत्मीय जनों को यमुना का जल नहीं मिल पा रहा है। आज यमुना नदी की स्थिति क्या है यह किसी से छुपी नही है। इसमें शहर का गंदा पानी नालों का पानी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से गिर सकता है लेकिन शवदाह गृहों में मृत शरीर के अवशेष को यमुना में नहीं बहाया जा सकता है। कैसे होगी ब्रजवासियों की मुक्ति कौन पुनः भागीरथ की तरह आयेगा और इन मृत आत्माओं की मुक्ति के लिये यमुना को यहां तक लायेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1682357945413652365-1331308596130576116?l=sk1960.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sk1960.blogspot.com/feeds/1331308596130576116/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2011/08/blog-post_3936.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/1331308596130576116'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/1331308596130576116'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2011/08/blog-post_3936.html' title='यमुना के बिना कैसे होगी मुक्ति'/><author><name>Sunil Sharma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02992199244288833748</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-Z9etkckx2Ys/TjYd_5xe8cI/AAAAAAAAAPM/vT3wCtfFqnw/s220/IMG_1158.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1682357945413652365.post-404394106674053245</id><published>2011-08-01T07:46:00.000-07:00</published><updated>2011-08-01T07:48:09.248-07:00</updated><title type='text'>‘‘ब्रज और गोपिन के रखबारे गिरिराज हमारे’’</title><content type='html'>मथुरा से सुनील शर्मा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह गोवर्धन पूजा किसने की ?&lt;br /&gt; जिसने इन्द्र लोक को भयशून्य बनाया, सिसने उस पूतना का वध किया, तृणावर्त का मर्दन किया, जोड़वाँ अर्जुन के वक्षों को जड़ से उखाड़ दिया, धेनुकासुर का वध किया, कालियानाग का दमन किया, धेनुकासुर एवं प्रलम्बासुर का विनाश किया और दो बार दावागिं का पान किया उसी ने यह पूजा शुरू की है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;‘‘ब्रज और गोपिन के रखबारे गिरिराज हमारे’’&lt;br /&gt;(सुनील शर्मा)&lt;br /&gt; दीपावली के पाँच पर्व जिसमें धनतेरस, नरक चौदस,दीपावली, गोवर्धन पूजा और यम द्वितीया का पर्व तो घर घर में मनाये जाते हैं। लेकिन ब्रजभूमि में गोर्वधन पूजा पर्व का सर्वाधिक महत्व माना जाता है ब्रज में दीपावली से अधिक गोवर्धन पूजा के दिन साज सज्जा की  जाती है। जगह-जगह सार्वजनिक स्थानों पर बडे़ बडे़ गोवर्धन बनाये जाते हैं। साथही यह परम्परा हर घर में भी निभाई जाती है। इस लिये दीपावली को जहां दुलहन के रूप में कल्पना की गई है वहीं गिरिराज गोवर्धन को वर के रूप में चित्रित किया गया है। &lt;br /&gt;‘‘गिरिराज बन्यों दूल्है और दुल्हन दिवारी है’’।&lt;br /&gt; गिरिराज गोवर्धन की महत्ता का कारण है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने इन्द्र का दर्प दमन कर गिरिराज गोवर्धन पर्वत को अपनी कन्नी अंगुली पर छत्र की तरह धारण किया था और गिरिराज गोवर्धन की पूजा प्रारम्भ की उसी परम्परा में आज भी दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ला प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।&lt;br /&gt; पौराणिक कथाओं के अनुसार पहले ब्रज में इन्द्र की पूजा प्रचलित थी और समस्त ब्रजवासी उसकी पूजा किया करते थे। बाल गोपाल श्री कृष्ण के कहने पर ब्रजवासियों ने इन्द्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन की पूजा शुरू कर दी थी इससे इन्द्र कुपित हो गया और उसने समूचे ब्रजवासियों को अपनी पूजा करने को कहा अन्यथा नाश कर देने की बात कही इन्द्र की इस घोषणा से घबराये ब्रजवासियों से गोपाल ने  कहा कि भय और आतंक की पूजा न करके प्रेम की पूजा करो, जिसकी वजह से हमारी फसलें हमारे पशुधन, हमारा सर्वस्व नष्ट हो जाएं तो उसकी पूजा क्यों की जाये। &lt;br /&gt; गोपाल की यह बात ब्रजवासियों को समझ में आ गई और उन्होंने गोपाल के कहने पर गिरिराज गोवर्धन की पूजा शुरू कर दी। उस समय ऐसा प्रतीत होने लगा जैसे सारा ब्रज गिरिराज की गोद में समा गया हो।&lt;br /&gt;इससे इन्द्र का कोप और बढ़ गया आकाश में नगाड़े बजने लगे, उसने गोवर्धन के उपासकों को नष्ट भ्रष्ट करने की ठान ली, प्रलयकारी वज्र कड़कने लगे ब्रज के ऊपर गरजने लगे। घनघोर घटाओं ने दिन को रात में बदल दिया। मेघों की गर्जना से ब्रज में आतंक की आंधी आ गई। बड़े-बड़े वृक्ष धराशायी होने लगे। गऊएं रक्षा के लिए पुकारने लगीं। बाल-गोपाल, नर-नारी आंखे मंूद कर अपने अंतिम क्षणों की प्रतीक्षा करने लगे। उस समय सभी लोग ‘‘हे-गोपाल, हे गोपाल’’ जपने लगे। माता यशोदा का हृदय भी फटने जैसा होने लगा। सभी लोग उस समय गोपाल की ओर टकटकी लगाए निरीह भाव से देखने लगे। &lt;br /&gt; पलभर में निहत्था गोपाल उठकर खड़ा हो गया। यकायक धरती कांपने लगी लोग गिरने, पड़ने लगे, पर्वत ऊपर उठने लगा। जैकारा लगा ‘‘गिरिराज धरण की जय’’। कान्हा की नन्हीं सी अंगुली पर गिरिराज पर्वत था। इस घड़ी की तो प्रतीक्षा सभी को थी। युग-युग का संकल्प पूरा हुआ। देवकी गर्म-संभूत यशोदा नंदन ने गिरिराज को छत्र की तरह धारण कर लिया और इन्द्र के कोप से ब्रज-वसुन्धरा को जल प्लावन से बचा लिया। &lt;br /&gt; गोवर्धन पूजा के दिन ब्र्रज के प्रत्येक घर में अन्नकूट का आयोजन किया जाता है। बल्लभकुल सम्प्रदाय के मंदिरों में अन्नकूट को अत्यन्त वृहद और भव्य रूप में मनाने की परम्परा है। इसकी तैयारियां विजया दशमी के दिन से प्रारंभ हो जाती है। 21 दिनों तक लगातार अनेकों स्वादिष्ट व्यंजन बना कर तैयार कर लिये जाते हैं और इस दिन गिरिराज महाराज का छप्पनों व्यंजनों से भोग लगाया जाता है। बाद में इस प्रसाद को भक्तों में वितरित भी किया जाता है।&lt;br /&gt; प्रत्येक पूर्णिमा और गुरूपूर्णिमा पर लाखों भक्त देश विदेश से यहां आकर अपना मनोरथ पुरा करते हैं। सात कोस के इस परिक्रमा मार्ग में कैसे दस पन्द्रह लाख लोग अटते खटते है यह गिरिराज ही जानें नंगे पाँव, दंडौती लगाकर अपनी अपनी सामर्थ के अनुसार परिक्रमा को पूरा करते हैं। हर जगह हर पगडन्ड़ी हर पुल पुलिया, सात कोस की परिक्रमा मार्ग में इंच इंच भूमि गिरिराज मयी हो जाती है। पैर सूज जाते हैं फफोले पड़ जाते हैं परन्तु तीव्र गति लिये लोग अपनी परिक्रमा को पूरा करते हैं। भूख प्यास का भी ख्याल तक नहीं रहता है परिक्रमा पूरी करने पर ही कुछ देखा जायेगा। ऐसा भाव, इतनी आस्था का भाव लिये बस अपनी अपनी परिक्रमा पूरी करने की इच्छा सबको रहती है।&lt;br /&gt;‘‘सवै भूमि गोपाल की आमें अटक कहां&lt;br /&gt;जाके मन में अटक है सोई अटक जाय’’&lt;br /&gt;महाप्रभु बल्लभाचार्य ने गोवर्धन धारी श्रीनाथ जी के विग्रह को अपना आराध्य बनाया चैतन्य महाप्रभु और उनके पार्षद रूप जीव और सनातन गोस्वामियों ने बंगाल से यहां तक का फासला भाव विहवल होकर नाचते गाते पूरा किया था। चंड़ीदास और मैथिल कोकिल विम्वापति को भी इसी भाव ने मोहित किया। जयदेव की बासुरी भी इसी भाव में घुली मिली। इस ब्रज भाव ने रसखान जैसे विजातीय को भी श्रीकृष्ण का अनन्य भक्त बना दिया। सूरदास सहित अष्ट छाप कवियों ने अपनी अष्टवीणा वादन से भगवान की स्तुति की उसके स्वर विदेशों तक में गूँजे। अहिन्दी भाषी विद्वान आज भी ब्रज साहित्य पर शोध करने के लिए यहां आते हैं। उर्दू&lt;br /&gt;लेखक शायरों ने भी इसी भाव से लहरें ली हैं। अंग्रेज कलक्टर एफ.एस.ग्राउज ने भी समूचा ब्रज खंगाल ड़ाला था।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1682357945413652365-404394106674053245?l=sk1960.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sk1960.blogspot.com/feeds/404394106674053245/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2011/08/blog-post_01.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/404394106674053245'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/404394106674053245'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2011/08/blog-post_01.html' title='‘‘ब्रज और गोपिन के रखबारे गिरिराज हमारे’’'/><author><name>Sunil Sharma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02992199244288833748</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-Z9etkckx2Ys/TjYd_5xe8cI/AAAAAAAAAPM/vT3wCtfFqnw/s220/IMG_1158.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1682357945413652365.post-1010572156966629523</id><published>2011-08-01T07:25:00.000-07:00</published><updated>2011-08-01T07:25:13.257-07:00</updated><title type='text'>सात लाख रुपयों में नीलाम हुआ था ताज महल</title><content type='html'>सात लाख रुपयों में नीलाम हुआ था ताज महल&lt;br /&gt;मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद जैन ने खरीदा था।&lt;br /&gt;अंग्रेजों ने अनेक स्मारक किये थे नीलाम।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मथुरा (सुनील शर्मा) विश्व प्रसिद्ध व शाहजांह व मुमताज के प्रेम की निशानी ताज महल की नीलामी सात लाख रुपयों में की गई थी। मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद जैन ने इसे खरीदा था। तत्कालीन अंग्रेज सरकार ने अपने शासन काल में आगरा के अनेक ऐतिहासिक स्मारकों को बेचा था। मुगल सम्राट शाहजांह ने अपनी बेगम की याद में जिस नायाब इमारत को ताजमहल के रूप में बनवाया था। वह मुगल सलतनत के कमजोर पड़ते ही अंग्रेज हुकुमत के हाथों नीलाम भी हुआ।&lt;br /&gt;इतिहास गवाह है कि सन् 1803 से ईस्ट इण्डिया कंपनी ने आगरा पर अपना अधिकार जमा लिया था। पूरे देश में अंग्रेज कंपनी का शासन जम चुका था। अनेक राज घराने सेठ साहूकार अंग्रेजों के कृपा पात्र बन चुके थे। उसी समय मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद जैन जो बड़े प्रतापी, प्रभावशाली, उदार, धार्मिक और व्यवसाय में निपुण थे। उस समय अनेक छोटे बड़े अंग्रेज अफसर सेठ जी का सम्मान करते थे। मथुरा नगर और आस-पास में सेठ लक्ष्मी चंद जैन का एक छत्र शासन था। इसके कारण अंग्रेज सरकार सेठ जी पर विश्वास करती थी। अंग्रेज सरकार ने इनके परिवार को अनेक उपाधियों से विभूषित किया था। स्वयं वायस राय लार्ड कर्जन ने एक बार मथुरा पधारकर इनका आतिथ्य स्वीकार किया था। सन् 1815 में गर्वनर जनरल लार्ड एलगिन आगरा आए, उनके दरबार में पधारने वाले राजाओं के अलावा मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद जैन भी मौजूद थे। अंग्रेज सरकार ने अपने शासन काल में आगरा के अनेक ऐतिहासिक स्मारकों को बेचना शुरू कर दिया था। उस समय सिकंदरा रोड़ के उत्तर में खंदारी बाग के पीछे एक स्मारक था। वह भारतीय रंग में रंगे फारसी कवि अबुलफजल फैजी अकबर के काल को चित्रित करने वाले इतिहासकार और शिक्षा शास्त्री के पिता शेख मुबारक का स्मारक था। उसको मथुरा के सेठ लक्ष्मी चंद जैन को बेचा गया। इसी प्रकार मिर्जा गालिब की हवेली जो काला महल के रूप में जानी जाती थी। जहां मिर्जा गालिब का जन्म हुआ था। पीपल मण्डी में स्थित वह हवेली भी अंग्रेजों ने सेठ लक्ष्मीचंद जैन को बेच दी थी। अंग्रेजों ने यमुना नदी के किनारे बनी दारा की हवेली तथा औरंगजेब की हवेली समेत तमाम स्मारकों को उस समय नीलाम किया था। आगरा किले के निकट मच्छी भवन के आस-पास के संगमरमर के पत्थर भारी मात्रा में नीलाम करके बेचे गये थे। उन दिनों ज्योति प्रसाद जी ने भी आगरा की कई इमारतों को अंग्रेजों से खरीदा था। इसी दौरान ताज महल की नीलामी भी की गई। ताज महल की नीलामी के लिये उस समय अंग्रेज शासन की राजधानी रही कलकत्ता से प्रकाशित एक अंग्रेजी दैनिक जानबुल में 26 जुलाई 1831 के अंक में ताजमहल को बेचने की एक विज्ञप्ति प्रकाशित की गई थी। ताज महल की नीलामी के लिये बोली लगाई गई थी। उस नीलामी को सात लाख रुपयों में मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद जैन ने खरीद लिया था। जिसके बाद ताजमहल का स्वामित्व सेठ लक्ष्मीचद जैन का हो गया था। लेकिन कुछ समय बाद एक अंग्रेज अफसर ने उस नीलामी को निरस्त कर दिया था। इस प्रकार ताज महल के पुराने मान चित्र तथा नक्काशीदार पत्थरों को विलियम वैटिंग ने नीलाम करके बेच दिये थे। कुछ पत्थरों को लार्ड हैस्टिंग ने इंग्लैण्ड भी भेजा था। आज भी सेठ लक्ष्मीचंद जैन के वंसज मथुरा में रहते हैं। सेठ लक्ष्मी चंद जैन ने मथुरा में स्थित चौरासी में जम्बूस्वामी का जैन मंदिर का निर्माण कराया तथा चौरासी के जैन मंदिर में भगवान अजित नाथ की विशाल प्रतिमा को ग्वालियर से लाकर मंदिर में प्रतिष्ठा कराई थी। जैन होते हुए भी सेठ लक्ष्मी चंद जैन ने अनेक धर्मों के मंदिरों मस्जिदों व चर्चो को बनवाने में सहयोग किया था। द्वारकाधीश का सुप्रसिद्ध मंदिर एवं वृंदावन स्थित रंगजी के विशाल मंदिर का निर्माण भी उन्हीं के द्वारा कराया गया था। मथुरा में स्थित ईदगाह के निर्माण जीर्णोद्धार व मथुरा में ही स्थित एक चर्च के निर्माण में सहयोग के लिये सेठ लक्ष्मीचंद जैन को आज भी याद किया जाता है। आज उन्हीं के वंशज सेठ विजय कुमार जैन जम्बूस्वामी सिद्ध क्षेत्र चौरासी के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। तथा मथुरा में रहकर समाज सेवा के कार्य में लगे है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1682357945413652365-1010572156966629523?l=sk1960.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='https://www.google.com/accounts/ServiceLogin?service=mail&amp;passive=true&amp;rm=false&amp;continue=https%3A%2F%2Fmail.google.com%2Fmail%2F%3Fui%3Dhtml%26zy%3Dl&amp;bsv=llya694le36z&amp;ss=1&amp;scc=1&amp;ltmpl=default&amp;ltmplcache=2&amp;hl=en-GB&amp;from=logout' title='सात लाख रुपयों में नीलाम हुआ था ताज महल'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sk1960.blogspot.com/feeds/1010572156966629523/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2011/08/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/1010572156966629523'/><link rel='self' 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है। वहीं जेलों में मिलने वाला घटिया खाना खाने तथा पैरॉल व होमलीव न मिलने से कैदियों में विद्रोह की भावना पनप रही है, इसी का परिणाम था कि मथुरा जिला जेल से पिछले माह चार कैदी फरार हुये थे। दो दिन पूर्व इसी कुण्ठा के चलते कैदियों ने सामूहिक रूप से भोजन का बहिष्कार कर दिया था किसी तरह जेल प्रशासन ने उन्हें मनाया था। प्रदेश सरकार की नीतियों और ब्यूरोक्रेटस के दबाव के चलते पैरॉल और होमलीव का अधिकार भी मण्डलायुक्त और जिलाधिकारी से छीन कर प्रदेश सचिवालय के हाथों सौंप दिया। यूं तो प्रदेश की सभी जिला जेलों में क्षमता से अधिक कैदी ठंूस रखे है। प्रदेश की जेलों में 28 हजार कैदियों की अपेक्षा 90 हजार के करीब कैदी बंद है। इसी तरह मथुरा जिला कारागार में 554 कैदियों की क्षमता के विपरीत 11 सौ कैदी बंद है। जिनमें अधिकांश विचाराधीन कैदी है। जेल में आने के कारण इन्हें ढंग से खाना भी नहीं मिल पाता। वैसे भी जेल मैन्युअल के अनुसार कैदियों को औसत दर्जे का भोजन दिये जाने का प्रावधान है।  प्राप्त जानकारी के अनुसार कैदियों को प्रातः चाय, एक बार नाश्ता एवं दो टाइम खाने के लिये प्रति कैदी अठारह या बीस रुपये की राशि निर्धारित है। इस छोटी सी रकम में एक व्यक्ति को ढंग से नाश्ता भी नहीं कराया जा सकता, खाना वो भी दो टाइम कैसे खिलाया जा सकता है। घटिया स्तर का खाना मिलने एवं लम्बे समय से जेल में बंद कैदियों में पैरॉल पर रिहाई न मिलने एवं होमलीव न मिलने से ये लोग डिप्रैशन के शिकार हो सुधरने के बजाय गलत रास्ता अख्तियार करने लगते है। इसके पीछे इन कैदियों का परिजनों से मुलाकात न हो पाना भी है। जेल प्रशासन के अनुसार कुछ दिन तक तो कैदियों के परिजन इनसे मिलाई (मुलाकात) के लिये यहां हफ्ते दस दिन के अंतराल पर आते रहते है लेकिन धीरे-धीरे  यह क्रम दूर जात है।  और कैदी मानसिक रूप से व्यथित होने लगता है। और गलत कदम उठाने को मजबूर होते है। जेल प्रशासन के अनुसार सश्रम कैद की सजा भो रहे लोगों को भी काम के लिये जेल से बाहर खेतों पर काम के लिये नहीं लाया जाता। इसके पीछे कर्मचारियों बंदी रक्षकों की कभी मुख्य कारण है। यदि कैदियों को बाहर लाया जाये तो उनकी रखवाली आवश्यक है। यदि ये लोग काम में व्यस्त रहे तो इनका दिमाग किसी खुरापात (गलत कार्य) की ओर नहीं जायेगा। पैरोल और होमलीव पर कैदियों के न भेजे जाने के पीछे भी जेल प्रशासन की मजबूरी है। पूर्व में कैदी को 15 दिन की होमलीव देे का अधिकार जिला मजिस्ट्रेट को एवं पैरोल पर रिहाई स्वीकृति का अधिकार मण्डलायुक्त को था। लेकिन वर्ष 2007 में प्रदेश सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर ऐसी स्वीकृति प्रदेश स्तर से करने की घोषणा कर दी। कैदियों के परिजनो के लिये सचिवालय से पैरोल/होमलीव स्वीकृत कराना तो दूर की बात है, वहां प्रवेश पाना भी मुश्किल है। इसी तरह पूर्व में लम्बे अर्से से जेल में बंद सजाकाट रहे या विचाराधीन कैदियों के अच्छे चाल-चलन की जेल अधिकारियों से मिली रिपोर्ट पर स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस पर प्रदेश सरकार द्वारा रिहाकर दिया जाता था। लेकिन अब वर्ष 2001 के बाद पूरे प्रदेश की किसी भी जेल से एक भी कैदी की रिहाई नहीं की गई है। वहीं जेल से 14 वर्ष बाद कैदियों को नौमीनलरौल प्रदेश सरकार को भेजा जाता था अब वो व्यवस्था भी खत्मकर दी गई। जिससे जेलों में कैदियों की संख्या तो बढ़ती ही जा रही है लेकिन कर्मचारियों की भर्ती पर प्रदेश सरकार का कोई ध्यान नहीं है। मथुरा जिला कारागार भी इन समस्याओं से अछूती नहीं है। यहां कोई कुक या फॉलोअर तक तैनात नहीं है। जिससे कैदियों को ही खाना पकाना पड़ता है। एक तो घटिया सामिग्री और ऊपर से अप्रशिक्षित रसोइये जो खाने का स्वाद ही बिगाड़ देते है। बजट की कमी चलते जेल प्रशासन कैदियों के मनोरंजन, या सुधार हेतु कोई कार्यक्रम भी नहीं करा सकता वहीं समाज सेवा संस्थाओं द्वारा प्रवचन, धार्मिक कार्यक्रम या योगा प्रशिक्षण कैम्प लगाने के प्रस्ताव दिये जाने पर जेल प्रशासन जगह की कमी की बात कह हाथ खड़े कर देता है। फिर कैसे जिला जेल में बंदी कैदियों के आचरण में सुधार आ सकेगा। सिर्फ जिला कारागार को बंदी सुधार गृह नाम दे देने से कैदियों की मानसिकता नहीं बदली जा सकती, इसके लिये बुनियादी और आवश्यक सुविधाएं मुहैया करानी ही होगी। इस संबंध में जिलाधिकारी के मोबाइल पर बात करने का प्रयास किया गया। लेकिन वह दूरभाष पर उपलब्ध न हो सके। एसएसपी बीडी पाल्सन से जब बात की गई तो उन्होंने जेल प्रशासन को सिटी मजिस्टेªट द्वारा देखे जाने की बात कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया।&lt;br /&gt;धोती से कारागार प्रशासन भयभीत&lt;br /&gt;मथुरा। कारागार प्रशासन धोती से बुरी तरह भयभीत है। आज जब एक बुजुर्ग कैदी के लिए धोती जेल में ले जाने की पेशकश की गई तो कारागार के अधिकारी भयग्रस्त हो गए। उल्लेखनीय रहे कि बीस जून को धोती के सहारे ही जिला कारागार की दीवार फांदकर चार कैदी भाग खड़े हुए थे। धोती की रस्सी बनाकर कैदियों के भागे जाने की घटना के बाद से कारागार प्रशासन धोती से बुरी तरह भयभीत है। ..........&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1682357945413652365-2907879168426214077?l=sk1960.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sk1960.blogspot.com/feeds/2907879168426214077/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2010/07/blog-post_27.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/2907879168426214077'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/2907879168426214077'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2010/07/blog-post_27.html' title='कारागार में बढ़ती अव्यवस्था को लेकर कैदियों में विद्रोह की स्थिति'/><author><name>Sunil Sharma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02992199244288833748</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/-Z9etkckx2Ys/TjYd_5xe8cI/AAAAAAAAAPM/vT3wCtfFqnw/s220/IMG_1158.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1682357945413652365.post-8409119423158652812</id><published>2010-07-19T09:36:00.000-07:00</published><updated>2010-07-19T09:43:48.702-07:00</updated><title type='text'>आखिर एसडीएम गुप्ता ने आत्महत्या करने का प्रयास क्यों किया</title><content type='html'>&lt;p&gt;मथुरा से सुनील शर्मा&lt;br /&gt;आखिर एसडीएम गुप्ता ने आत्महत्या करने का प्रयास क्यों कियातरह-तरह की चर्चाएं, हर कोई वजह तलाशता नजर आ रहा है&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आखिर एसडीएम गुप्ता ने आत्महत्या करने का प्रयास क्यों कियातरह-तरह की चर्चाएं, हर कोई वजह तलाशता नजर आ रहा हैमथुरा। गोली मारकर खुद को घायल करने वाले एसडीएम की हालत में दूसरे दिन के बाद भी कोई सुधार नहीं आया है उनकी हुई है तथा उन्हें आगरा के एक निजी अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में रखा गया है। अधिकारी बराबर अस्पताल में आ जा रहे हैं। अधिकारी व पुलिस इस मामले में कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं लेकिन एसडीएम द्वारा आत्महत्या के प्रयास की दिनभर चर्चा होती रही जितने मुंह उतनी बातें सुनने को मिल रही हैं। पुलिस भी मामले की रिपोर्ट दर्ज करने को तहरीर का इंतजार कर रही है। एसडीएम द्वारा आत्महत्या से पूर्व छोड़ गया सुसाइड नोट पर भी लोगों ने प्रश्नचिन्ह लगा दिये है। आत्महत्या की वजह तलाशता हर व्यक्ति यह कह रहा है कि आखिर एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा जिसकी हर तरह की जिम्मेदारियां पूर्ण हो चुकी हों या फिर पूरी तरह सम्पन्न हो वह ऐसा क्यों कर सकता है या फिर इसके पीछे कोई और वजह है जो इस अधिकारी को इतना बड़ा फैसला लेने को मजबूर होना पड़ा। शनिवार की सुबह मांट के एसडीएम राजीव गुप्ता ने अपने मथुरा स्थित सरकारी आवास पर खुद को अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से गोली मार ली थी। गोली उनकी कनपटी में लगी गंभीर अवस्था में उन्हें आगरा के कामायनी हॉस्पीटल में भर्ती कराया गया है। जहां उनकी हालत स्थिर बनी हुई हैं।  यहां जिले के समस्त अधिकारी व पुलिस अधिकारियों के अलावा जिलाधिकारी दिनेश चंद्र शुक्ला बराबर सम्पर्क बनाये हुए हैं। कामायनी हॉस्पीटल में आगरा तथा मथुरा के प्रशासनिक अधिकारी व पुलिस अधिकारी मौजूद हैं। उधर थाना सदर बाजार पुलिस ने आत्महत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज नहीं की है। पुलिस को एसडीएम के परिजनों द्वारा तहरीर दिये जाने का इंतजार है। इसी बीच सोमवार की सुबह ही सदर बाजार थानाध्यक्ष विजय बहादुर सिंह समेत पांच थानाध्यक्षों में फेरबदल किया गया है। दूसरी तरफ एसडीएम गुप्ता की पत्नी के समक्ष उनके सरकारी आवास की हर तरफ से जांच की गई तथा वहां रखी हर वस्तु व हालात की वीड़ियों ग्राफी तक कराई गई। बताया जाता है कि उनके एटीएम कार्ड व कुछ अन्य जरूरी चीजें घर से गायब हैं उनके तीन मोबाइल भी घटना के बाद से गायब हैं। जबकि पुलिस के अनुसार तीनों मोबाइलों को सील किया गया है। एसडीएम मांट के मोबाइल की कॉल डिटेल भी अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगी है। यदि यह कॉल डिटेल मोबाइलों की मिल जाये तो घटना का सारा राज खुलकर सामने आ जायेगा। पुलिस ने अभी तक यह जानने का प्रयास नहीं किया कि एसडीएम मांट शनिवार सुबह से कहां-कहां गये किस-किस से मिले थे। तथा उनके मथुरा स्थित सरकारी आवास पर कौन-कौन आया था तथा इस दौरान श्रीगुप्ता से किस-किस ने उनके मोबाइल पर बातें की है। कुछ भी हो यह मामला काफी उलझा हुआ लग रहा है यदि इस घटना को ठीक से पुलिस खोलती है तो बड़े-बड़े लोगों के चेहरे सामने आ जायेंगे। आखिर एसडीएम गुप्ता के आत्महत्या करने की कोई न कोई वजह जरूर है।------&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1682357945413652365-8409119423158652812?l=sk1960.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sk1960.blogspot.com/feeds/8409119423158652812/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2010/07/blog-post.html#comment-form' 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type='text'>अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में चल रही है मोनोपोली</title><content type='html'>प्रदेश के विभिन्न जनपदों में चल रहे सीवीएसई के विद्यालयों की ओर से हर वार परीक्षा परिणाम आने के वाद समाचार पत्रों में छपे विज्ञापनों को देख कर हर अभिभावक भ्रमित हो जाता है। बडे़ बडे़ विज्ञापनों के जरिये उस सच को छुपाने का प्रयास किया जाता है जो हकीकत है सौ प्रतिशत परीक्षा परिणाम का दावा भरने वाले विद्यालयों की हकीकत कुछ ओर ही वया करती है।हर मध्यम तथा सम्पन्न परिवार का व्यक्ति अपने नन्हें-मुन्ने लाड़लों को सुविधा सम्पन्न विद्यालय में षिक्षा दिलाने के पक्ष में रहता है। अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में प्रवेष को लेकर मारा मारी भी रहती है। अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों के संचालकों की मोनो पोली के चलते इन विद्यालयों में बच्चों को पहले तो आसानी से प्रवेष नहीं मिल पाता है जिसकी वजह से अभिभावक पैसा खर्च करने के साथ-साथ प्रवेष के लिए हर जुगाड लगाने को तैयार रहते हैं। जनपद में कुछ विद्यालय ऐसे भी हैं जहां नवीं कक्षा में और ग्यारहवीं कक्षा में कमजोर रहने पर या तो विद्यालय प्रशासन परीक्षा में बैठने नहीं देते हैं या फिर उन्हे किसी तरह से पास की टीसी देकर चलता कर देते हैं इससे इन विद्यालयों को दो फायदे हो जाते हैं एक तो कमजोर छात्र स्कूल से निकल जाते हैं और कॉलेज का परीक्षाफल भी स्वतंही शत प्रतिशत हो जाता है। ऐसे विद्यालय एडमीशन के समय ही 1200-1500 से अधिक छात्र व छात्राओं को अपने यहां प्रवेश परीक्षा में विठा कर उनकी योग्यता के आधार पर प्रवेश दे देते हैं। कमजोर व कम अकं वाले छात्रों को इन विद्यालयों में प्रवेश नहीं मिल पाता है। ऐसे में सेकडों छात्र व छात्राएं डिप्रेशन के शिकार तक हो जाते हैं। और इसका खमियाजा वच्चों को तो भुगतना पडता ही है साथ ही अभिभवकों को भी कम परेशानी नही उठानी पड़ती है। अनेक छात्र छात्राएं अन्य विद्यालयों में प्रवेश पाने को आज भटक रहे हैं उन्हे प्रवेश भी नहीं मिल पा रहा है।सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा में बैठे बच्चों के विद्यालय वार रिर्जल्ट को देखा जाय तो हकीकत सामने आ जाती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1682357945413652365-7167201298902661689?l=sk1960.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sk1960.blogspot.com/feeds/7167201298902661689/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2010/03/1200-1500.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/7167201298902661689'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1682357945413652365/posts/default/7167201298902661689'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sk1960.blogspot.com/2010/03/1200-1500.html' title='अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में चल रही है मोनोपोली'/><author><name>Sunil Sharma</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02992199244288833748</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' 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